दंतेवाड़ा में नियमों को ठेंगा: अस्पताल के 'जहरीले कचरे' से शहर में संक्रमण का खतरा, सांसों पर पहरा
दंतेवाड़ा | संवाददाता
छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा नगरपालिका क्षेत्र में कचरा प्रबंधन की बदहाली स्थानीय निवासियों और पर्यावरण के लिए नासूर बनती जा रही है। शहर के रिहायशी इलाकों समेत निजी अस्पतालों और पैथोलॉजी लैब से निकलने वाला 'बायोमेडिकल वेस्ट' खुले में फेंका जा रहा है, जो किसी बड़ी महामारी को खुला निमंत्रण दे रहा है।
नियमों की उड़ी धज्जियाँ, 'मौत' का सामान खुले में
बालूद गांव के समीप डंपिंग यार्ड का नजारा बेहद डरावना है। यहां प्रयुक्त सुइयां, नुकीले ब्लेड और खून से सनी संक्रमित पट्टियां सामान्य कचरे के साथ बिखरी पड़ी हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, इस लापरवाही से क्षेत्र में हेपेटाइटिस और अन्य गंभीर संक्रामक बीमारियों के फैलने की आशंका कई गुना बढ़ गई है।
कागजों तक सीमित 1 अप्रैल के नए नियम
हैरानी की बात यह है कि 1 अप्रैल 2026 से लागू हुए नए ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (SWM) नियमों के तहत कचरे को गीला, सूखा, सैनिटरी और विशेष श्रेणियों में बांटना अनिवार्य है। लेकिन दंतेवाड़ा में इन नियमों का पालन धरातल पर शून्य है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कचरे का वैज्ञानिक निस्तारण करने के बजाय उसे चुपके से जलाया जा रहा है। इससे निकलने वाला जहरीला धुआं कैंसर और फेफड़ों के रोगों का कारण बन सकता है।
बेजुबानों पर भी आफत
यह लापरवाही केवल इंसानों ही नहीं, बल्कि मवेशियों के लिए भी जानलेवा साबित हो रही है। कचरे के ढेर में पड़े प्लास्टिक और मेडिकल वेस्ट को चारा समझकर खाने से क्षेत्र के पालतू पशु बीमार हो रहे हैं।
अधिकारी के दावे और जमीनी हकीकत में फर्क
हालांकि, नगरपालिका के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CMO) पाल दास का दावा है कि मेडिकल वेस्ट को जमीन में दबाया जा रहा है और कचरा जलाने पर पूर्ण प्रतिबंध है। लेकिन डंपिंग साइट की हकीकत इन दावों की पोल खोल रही है। करीब 500 मीटर के दायरे में फैली ग्लूकोज की बोतलें और दवाइयों का अंबार साफ बता रहा है कि प्रशासन की कार्यप्रणाली केवल कागजों तक सीमित है।
मुख्य बिंदु जो रिपोर्ट को प्रभावी बनाते हैं:
- आक्रामक शीर्षक: 'जहरीला कचरा' और 'नियमों को ठेंगा' जैसे शब्दों का प्रयोग।
- तथ्यात्मक जानकारी: 1 अप्रैल 2026 के नए नियमों का विशेष उल्लेख।
- मानवीय पक्ष: ग्रामीणों के स्वास्थ्य और मवेशियों की जान पर खतरे को उजागर किया गया है।
- प्रशासनिक विरोधाभास: अधिकारी के बयान और जमीनी सच की तुलना।








