छत्तीसगढ़ के सबसे समृद्ध मंदिर ट्रस्ट में पुजारियों की आर्थिक पीड़ा, न्यूनतम मजदूरी से भी कम मानदेय

रायपुर। करोड़ों रुपये की संपत्ति और चढ़ावे वाले छत्तीसगढ़ के प्रमुख मंदिर ट्रस्टों में शामिल एक प्रतिष्ठित देवस्थान में सेवा देने वाले पुजारियों की आर्थिक स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। मंदिर की धार्मिक गरिमा और विशाल आय के बावजूद यहां कार्यरत पुजारियों को ऐसा मानदेय मिल रहा है, जो राज्य की निर्धारित न्यूनतम मजदूरी से भी कम बताया जा रहा है।

वर्षों से पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठानों की जिम्मेदारी निभा रहे पुजारियों का कहना है कि मौजूदा मानदेय में परिवार का पालन-पोषण करना अत्यंत कठिन हो गया है। बढ़ती महंगाई, बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और दैनिक जरूरतों के बीच उन्हें आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है। कई पुजारियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि सम्मान तो मिलता है, लेकिन जीवनयापन के लिए पर्याप्त आर्थिक सहयोग नहीं मिल पा रहा।

पुजारियों का आरोप है कि मंदिर ट्रस्ट की आय लगातार बढ़ रही है, लेकिन उनके वेतन और सुविधाओं में वर्षों से अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। कुछ पुजारियों ने यह भी कहा कि धार्मिक सेवा को समर्पित जीवन जीने के बावजूद उन्हें अतिरिक्त रोजगार तलाशने की मजबूरी हो रही है।

इधर, इस मुद्दे के सामने आने के बाद श्रद्धालुओं और सामाजिक संगठनों ने भी चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि जिन पुजारियों के माध्यम से मंदिर की परंपरा और धार्मिक व्यवस्था संचालित होती है, उनकी आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करना ट्रस्ट की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए।

मामले को लेकर मंदिर ट्रस्ट प्रबंधन की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन पुजारियों की मांग है कि उन्हें सम्मानजनक वेतन, सामाजिक सुरक्षा और अन्य मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं, ताकि वे आर्थिक चिंता से मुक्त होकर धार्मिक सेवा कर सकें।