CGPSC घोटाला: हाईकोर्ट ने आरोपी उत्कर्ष की अग्रिम जमानत याचिका खारिज की
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने CGPSC 2020-2022 परीक्षा घोटाले के आरोपी उत्कर्ष चंद्राकर की अग्रिम जमानत याचिका को सिरे से खारिज कर दिया है। जस्टिस बिभु दत्त गुरु की सिंगल बेंच ने सुनवाई के दौरान सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि प्रश्नपत्र लीक करना उन लाखों युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ है जो दिन-रात कड़ी मेहनत करते हैं।
जांच में हुए सनसनीखेज खुलासे
सीबीआई (CBI) की जांच में इस घोटाले की कार्यप्रणाली को लेकर कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं:
- रुपयों की मांग: आरोपी उत्कर्ष चंद्राकर पर आरोप है कि उसने चयन कराने के बदले उम्मीदवारों से 50 से 60 लाख रुपये तक की मांग की थी।
- होटलों में पेपर की तैयारी: जांच में पाया गया कि परीक्षा से पहले उम्मीदवारों को रायपुर के सिद्धि विनायक पैलेस, बारनवापारा रिजॉर्ट और होटल वेंकटेश इंटरनेशनल में ठहराया गया था।
- प्री-एग्जाम लीक: प्रारंभिक परीक्षा (12 फरवरी 2022) से एक दिन पहले उत्कर्ष ने करीब 30-35 उम्मीदवारों को प्रश्नपत्र और उनके उत्तर उपलब्ध करा दिए थे।
- मेंस की तैयारी: मुख्य परीक्षा के दौरान भी मोबाइल के जरिए प्रश्नपत्र मंगवाकर रिजॉर्ट में ठहरे उम्मीदवारों को उत्तर याद कराए जाते थे।
- गवाह का बयान: मामले की अहम गवाह सुषमा अग्रवाल ने खुलासा किया कि उत्कर्ष ने उससे 25 लाख रुपये लिए थे और उम्मीदवारों को बस में भरकर बारनवापारा रिजॉर्ट ले जाया गया था।
क्या है CGPSC घोटाला?
यह पूरा मामला 2020 से 2022 के बीच हुई भर्ती प्रक्रियाओं में कथित भ्रष्टाचार से जुड़ा है।
- रसूखदारों का चयन: आरोप है कि योग्यता और पारदर्शिता को दरकिनार कर राजनीतिक और प्रशासनिक रसूख वाले परिवारों के करीबियों को डिप्टी कलेक्टर और डीएसपी जैसे उच्च पदों पर चयनित किया गया।
- पदों का विवरण: CGPSC 2021 के तहत 171 पदों के लिए भर्ती निकाली गई थी, जिसकी चयन सूची 11 मई 2023 को जारी हुई थी।
- CBI जांच: मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रदेश सरकार ने इसकी जांच सीबीआई को सौंपी है, जिसने छापेमारी में कई आपत्तिजनक दस्तावेज बरामद किए हैं।
योग्य उम्मीदवारों को बड़ी राहत
इसी मामले से जुड़ी एक अन्य खबर में, हाईकोर्ट ने उन 60 उम्मीदवारों को राहत दी है जिनके खिलाफ सीबीआई जांच में कोई आरोप (चार्जशीट) नहीं मिला है।
- नियुक्ति का आदेश: कोर्ट ने आदेश दिया है कि जिन बेदाग अभ्यर्थियों के खिलाफ कोई सबूत नहीं है, उन्हें 60 दिनों के भीतर नियुक्ति दी जाए।








