DMF घोटाला: पूर्व IAS अनिल टुटेजा को सुप्रीम कोर्ट से राहत, सशर्त जमानत मंजूर

रायपुर। कथित जिला खनिज फाउंडेशन (DMF) घोटाला मामले में पूर्व आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। सर्वोच्च अदालत ने करोड़ों रुपये के सिविल वर्क ठेकों में अनियमितता और सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाने के आरोपों से जुड़े मामले में उन्हें सशर्त जमानत दे दी है।

सुप्रीम कोर्ट ने रखीं कई शर्तें

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने जमानत देते हुए स्पष्ट किया कि अनिल टुटेजा फिलहाल छत्तीसगढ़ में नहीं रहेंगे। कोर्ट ने कहा कि इससे जांच और गवाहों पर किसी तरह का प्रभाव नहीं पड़ेगा। साथ ही उन्हें एक सप्ताह के भीतर अपना नया पता देने और हर सुनवाई में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने के निर्देश दिए गए हैं।

राज्य सरकार ने जताई आपत्ति

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता रवि शर्मा ने जमानत का विरोध किया। उन्होंने कोर्ट को बताया कि टुटेजा का नाम शराब, कोयला और सट्टेबाजी से जुड़े कई चर्चित मामलों में सामने आ चुका है। राज्य सरकार ने दलील दी कि आरोपी प्रभावशाली हैं और आर्थिक अपराधों में उनकी भूमिका की जांच अभी जारी है, इसलिए जमानत से जांच प्रभावित हो सकती है।

बचाव पक्ष ने दी ये दलील

टुटेजा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता शोएब आलम ने कहा कि उनके मुवक्किल करीब ढाई साल से जेल में हैं, जबकि अब तक ट्रायल शुरू नहीं हो पाया है। बचाव पक्ष ने अदालत को बताया कि मामले में 85 गवाह हैं और नौ आरोपी अभी भी सुनवाई का इंतजार कर रहे हैं।

वकील ने यह भी कहा कि अनिल टुटेजा उस समय उद्योग विभाग में संयुक्त सचिव थे, जबकि संबंधित ठेके जिला कलेक्टरों की ओर से जारी किए गए थे।

जांच एजेंसियों पर भी उठाए सवाल

बचाव पक्ष ने अदालत में आरोप लगाया कि सितंबर 2024 में राज्य सरकार ने टुटेजा को मामले का “किंगपिन” बताया था, लेकिन उनकी गिरफ्तारी फरवरी 2026 में की गई। वकील ने कहा कि जांच एजेंसियां लगातार नए मामले जोड़कर जमानत प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश कर रही हैं।

सुनवाई के दौरान अनिल टुटेजा ने कोर्ट से कहा कि वह सेवानिवृत्त अधिकारी हैं और परिवार के साथ सामान्य जीवन बिताना चाहते हैं। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें सशर्त जमानत प्रदान कर दी।