रायपुर,संवाददाता। राजधानी में स्मार्ट सिटी लिमिटेड और नगर निगम की महत्वाकांक्षी योजना 'स्मार्ट चौपाटी' वर्तमान में प्रशासनिक उपेक्षा और बदहाली की मिसाल बन गई है। साइंस कॉलेज मैदान के समक्ष से विस्थापित कर आमानाका ब्रिज के नीचे स्थानांतरित की गई यह चौपाटी पिछले छह माह से अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रही है। लगभग छह करोड़ रुपये की लागत से निर्मित इस प्रोजेक्ट के तहत विकसित 60 स्मार्ट कियोस्क (गुमटियां) आज धूल फांक रहे हैं, जिससे सैकड़ों परिवारों की आजीविका पर प्रश्नचिन्ह खड़ा हो गया है।
दावों के विपरीत धरातल पर शून्य सुविधाएं विदित हो कि 22 नवंबर 2025 को जब चौपाटी को शिफ्ट किया गया था, तब प्रशासन ने विद्युत, सुरक्षा और सड़क जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने का पुरजोर दावा किया था। किंतु विडंबना यह है कि आधे वर्ष की समयावधि व्यतीत होने के पश्चात भी धरातल पर स्थिति जस की तस बनी हुई है। सुनसान और उजाड़ स्थान होने के कारण ग्राहकों ने यहाँ से दूरी बना ली है, जिसके परिणामस्वरूप कारोबार पूरी तरह ठप हो चुका है।
युवा उद्यमियों का निवेश फंसा इस परियोजना से जुड़े कई शिक्षित युवाओं ने अपने 'स्टार्टअप' को नई दिशा देने हेतु लाखों रुपये का निवेश किया था। दुकानदार अभिषेक चंसोरिया के अनुसार, साज-सज्जा और सेटअप में हजारों रुपये व्यय किए गए थे, जो अब पूरी तरह डूबते नजर आ रहे हैं। प्रभावित दुकानदारों का स्पष्ट आरोप है कि बिना किसी ठोस कार्ययोजना के उन्हें ऐसे स्थान पर धकेल दिया गया जहाँ व्यवसाय की कोई संभावना नहीं है।
सुरक्षा राशि की वापसी हेतु संघर्ष दुकानदारों ने अनुबंध वाली एजेंसी पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। बताया जा रहा है कि एडवांस किराया और बिजली मीटर के नाम पर प्रति दुकानदार जमा की गई लगभग छह हजार रुपये की सुरक्षा राशि अब तक वापस नहीं मिली है। जून माह में ठेके की अवधि समाप्त हो रही है, ऐसे में प्रभावित व्यवसायी अब नगर निगम से सीधे हस्तक्षेप और बकाया राशि के भुगतान की मांग कर रहे हैं।
फैक्ट फाइल पर एक नजर:
- लागत: 06 करोड़ रुपये
- निर्मित कियोस्क: 60 इकाइयां
- विस्थापन तिथि: 22 नवंबर 2025
- प्रभावित परिवार: 500 से 700
प्रशासनिक पक्ष:
"आमानाका क्षेत्र में मूलभूत सुविधाएं सुनिश्चित की जा रही हैं। दुकानदारों की मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जा रहा है। संबंधित एजेंसी को नोटिस जारी कर दुकानें शीघ्र संचालित करने के निर्देश दिए गए हैं।" — अतुल चोपड़ा, मैनेजर सिविल, रायपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड।








