संवाददाता। छत्तीसगढ़ के सुदूर वनांचल से संघर्ष और जिजीविषा की एक ऐसी गौरवगाथा सामने आई है, जिसने सफलता के नए प्रतिमान स्थापित किए हैं। रायगढ़ जिले के संबलपुरी ग्राम के एक निर्धन तेंदूपत्ता संग्राहक के पुत्र अजय गुप्ता ने देश की प्रतिष्ठित 'भारतीय वन सेवा' (IFS) परीक्षा में अखिल भारतीय स्तर पर 91वीं रैंक अर्जित कर प्रदेश का मान बढ़ाया है। यह उपलब्धि इसलिए भी विशिष्ट है क्योंकि अजय ने बचपन के दिन जंगलों में तेंदूपत्ता और महुआ एकत्र करते हुए बिताए थे।
मेधा और परिश्रम का संगम अजय की शैक्षणिक यात्रा अत्यंत प्रेरणादायक रही है। उन्होंने अभावों के बीच शिक्षा को ही अपना अचूक अस्त्र बनाया। हाईस्कूल परीक्षा में 92.66 प्रतिशत और हायर सेकेंडरी में 91.40 प्रतिशत अंक प्राप्त कर उन्होंने अपनी प्रखर मेधा का परिचय दिया। उनकी इसी प्रतिभा के फलस्वरूप उन्हें राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (NIT), रायपुर में प्रवेश मिला, जहाँ से उनके सपनों को वैश्विक क्षितिज प्राप्त हुआ। उल्लेखनीय है कि अजय ने इस वर्ष की सिविल सेवा परीक्षा (CSE) में भी 452वीं रैंक प्राप्त कर अपनी बहुमुखी प्रतिभा को सिद्ध किया है।
शासकीय योजनाओं से मिला संबल अजय की इस अविस्मरणीय सफलता में छत्तीसगढ़ शासन की लोक-कल्याणकारी योजनाओं ने 'उत्प्रेरक' का कार्य किया। लघु वनोपज संघ द्वारा प्रदत्त छात्रवृत्ति और पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप ने उनके आर्थिक मार्ग की बाधाओं को दूर किया। अजय स्वयं स्वीकार करते हैं कि छुट्टियों के दौरान वे आज भी अपने पैतृक कार्यों में परिवार का हाथ बंटाते थे, जिससे उनका जुड़ाव अपनी माटी और वनों से सदैव बना रहा।
मुख्यमंत्री ने दी बधाई: वनाश्रित परिवारों की जीत मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अजय गुप्ता की इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर हर्ष व्यक्त करते हुए कहा कि यह सफलता छत्तीसगढ़ के वनवासियों के अटूट विश्वास की विजय है। मुख्यमंत्री ने गौरव के साथ उल्लेख किया कि जिस युवा ने स्वयं जंगलों में श्रम किया, अब वही वनों के संरक्षण का दायित्व संभालेगा। वन मंत्री केदार कश्यप ने भी अजय को दूरभाष पर शुभकामनाएं देते हुए इसे प्रदेश के हजारों वनाश्रित परिवारों के ऊंचे संकल्पों का प्रतीक बताया।
युवाओं के लिए बने आदर्श संसाधनों की सीमित उपलब्धता के बावजूद अजय गुप्ता आज प्रदेश के उन लाखों युवाओं के लिए 'रोल मॉडल' बनकर उभरे हैं, जो कठिन परिस्थितियों में सिविल सेवाओं का स्वप्न देखते हैं। उनकी सफलता यह संदेश संप्रेषित करती है कि यदि लक्ष्य के प्रति अडिग निष्ठा हो और शासन का संरक्षण प्राप्त हो, तो वनांचल का कोई भी प्रतिभावान युवा शीर्ष पदों तक पहुँच सकता है।








